-:ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल: पालीताणा:-
श्री गिरीशकुमार पी. वाघेला
श्री गिरीशकुमार पी. वाघेला
सहायक अध्यापक
इतिहास भवन
म.कृ.भावनगर
विश्व विद्यालय
मोब.०९९७४६८४४८३
-:ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल: पालीताणा:-
१. प्रस्तावना :
पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र है जीसके बारे में बहुत
कुछ जानने की उत्सुकता और शायद उसी उत्सुकता का परिणाम है एक प्रश्न –‘ पर्यटन ’ –
क्यों,कब,कैसे,और
कहा ?
मनुष्यों की
वैचारिकता,सामाजिकता व रीती-रिवाजो
में विभिन्नता पाई जाती है ! पर्यटन के प्रति
जागरूकता, मनुष्य की जरूरतों को प्रदशित करती है
और यही जरुरत प्रेरणा बनकर पर्यटन को प्रेरित भी करती है ! पर्यटक
लोग पर्यटन - आनंद प्राप्ति के लिए, आराम
व ताजगी के लिए, स्वास्थ्य के लिए, यात्रा,खेलो
व प्रतियोगिताओ में भाग लेने हेतु, नई संस्कृति के बारे
में जानने की इच्छा, जाती संबंधी या पारिवारिक कारण या
धार्मिक कारण के हेतु भी पर्यटन हो सकता है !
में अपने इस विषय में
ऐतिहासिक व धार्मिक कारण के हेतु प्रवासन क्षेत्र में बात करना चाहता हूँ ! किसी
धर्म-विशेष के व्यक्तियो द्रारा अपने मुख्य
धार्मिक पर्व या आयोजन में सम्मिलित होने के लिए यात्रा करता भी पर्यटन प्रेरक हैं
! इस विषय में पर्यटन क्षेत्र में
पालीताणा के बारे में बात करना चाहता हूँ
२. पालीताणा
का इतिहास और यात्रा स्थल का विकास :
पालीताणा
एक प्राचीन नगर है, जो पवित्र भूमि पादलिप्तपूर या पालीताणा
के नाम से पहेचाना जाता है ! पालीताणा जैन आचार्य
श्री पादलिप्तसूरिश्वरजी के नाम परसे वि.सं. ३७०
में नागार्जुन ने पादलिप्तपूर नगर बसाया ! जो आज पालीताणा के
नाम से प्रसिद्ध है ! “पालीताणा
का उल्लेख गोविन्दराज प्रभुतवर्ष के ई.स.८१८
से ८१९ में हवेली में से मिले दान शासन में पालीताणा का उल्लेख हुआ है !”१
पालीताणा के गोहिल
राजाओं ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ! जिसमे गोहिल कान्धोजी,ठाकुर
पृथ्वीराजजी,ठाकुर सुरसिंहजी (वि.सं.१९१९), ठाकुर
मानसिंहजी (वि.सं.१९४२), ठाकुर
बहादुरसिंहजी (ई.स.१९०५) आदी
पालीताणा की सत्ता का दौर सम्भाला और शासन किया !
३. शेत्रुन्जय
महातीर्थ :
पालीताणा
में आया हुआ शेत्रुन्जय पर्वत जैन धर्म का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध मंदिर या तीर्थधाम
है ! “जैन
धर्म के पांच पवित्र पर्वतो में शेत्रुन्जय, गिरनार, आबू, अष्टपाद
और समेतशिखर इन पर्वतो में से शेत्रुन्जय की यात्रा का महत्त्व कुछ अलग ही है !”२
शेत्रुन्जय
पर्वत पर बना हुआ प्रथम मंदीर लकडे (काष्ट) का
था ! किंतु शेत्रुन्जय की यात्रा पे आये
राजेन्द्रकुमार पाल और अमात्य ने अग्नी की भावी आशंका में वहाँ पत्थर के मंदीर का
निर्माण करवाया और वाग्भट्ट ने उसे पूर्ण किया ! इन
मंदिरों के निर्माण का कार्य आचार्य हेमचंद्राचार्य, महाराज
सिद्धराज, कुमारपाल, अमात्य
उदयन, वस्तुपाल-तेजपाल
और श्रेष्ठी जगडूशा आदि ने यह कार्य किया था !
समुद्र
की सपाटी से १९७७ फिट की ऊचाई पे शेत्रुन्जय पर्वत के अलग अलग शिखरों पर
११वीं से लेकर १६वीं शताब्दी के दौरान बने हुए श्वेत आरस पत्थर के
देरासर है ! यहाँ जैन धर्म के तीर्थंकरों में पहले
तीर्थंकर वृषभदेव से लेकर अंत में २४वे तीर्थंकर महावीर स्वामी ने इस तीर्थभूमि पर
से जैन धर्म का संदेश और प्रचार किया है !
१६४०
फिट की ऊँचाई से शेत्रुन्जय पर्वत का क्षेत्र २१ एकर में फैला हुआ है ! इस
पर्वत पर १०८ बड़े देरासर और ९ टुंक, ८७२ छोटे मंदीर आये
हुए है ! जिसमे ७००० जितनी जैन प्रतिमाएँ स्थापित है ! जय
तलेटी से शिखर की चोटी तक पहुँचनें में २ माईल का रास्ता और ३७५० जितनी सीडियाँ
चढनी पडती है ! इस पर्वत पर आदिनाथ का मुख्य मंदीर है ! यहाँ
के शेत्रुन्जय पर्वत पर के मंदीर सुबह के ७ बजे से लेकर शाम के ७ बजे तक ही खुले
रहते है !
जैन
धर्म में यह शेत्रुन्जय पर्वत मुख्य होने के कारण यहाँ जैन धर्म के लोग और इसके
अलावा अन्य धर्म के लोग भी जैन मंदीरों के
दर्शन और घुमने के लिये आते है ! इस पर्वत के बगल में
ही एक बड़ी नदी बहती है ! जिसका नाम शेत्रुन्जय नदी है ! जो
सारे भावनगर जिल्ले और भावनगर शहर की जीवादोरी मानी जाती है ! उस
पर शेत्रुन्जय बंध बना हुआ है ! यहाँ त्योंहारों में
लोग घुमने आते है !
४. पालीताणा
के त्योंहार :
पालीताणा
एक जैनो की नगरी मानी जाती है ! पवित्र भूमि जैन
तीर्थ पालीताणा में जैन धर्म के अनुयायी और अन्य धर्म के लोग भी यहाँ के त्योहारों
में दिखाई देते है ! यहाँ कार्तिकी पूर्णिमा, चैत्री
पूर्णिमा, और फागुन सूद तेरस की परिक्रमा के दौरान
मेले का आयोजन भी होता है!
४.१
कार्तिकी पूर्णिमा :
“जैन
धर्म के अनुसार श्री शेत्रुन्जय महातीर्थ की यात्रा अषाढ़ सूद पूर्णिमा से कार्तिकी
सूद चौदस तक शास्त्रोक्त विधि-विधान नहीं होता !”३
इन चार महीनो को चातुर्मास में जैन साधू-साधवी किसी भी जगह
विहार न करके एक ही जगह रुक कर गाँव,नगर,शहर
में जप,ताप,उपासना
करते है ! लोगों को व्याख्यान एवं धर्म का ज्ञान
देते है और चातुर्मास के पश्च्यात कार्तिकी पूर्णिमा के दिन श्री शेत्रुन्जय
महातीर्थ की शुभ यात्रा का आरंभ होता है ! इस दिन तीर्थयात्रा
के आरंभ से ही हजारों लोग पालीताणा में आकार यात्रा करके पुण्यलाभ लेते है !
४.२
जैन पंचमी ( लाभ पंचमी ) :
कार्तिकी
शुक्ल पंचमी शुभ तिथि मानी जाती है ! इस नए साल में पुस्तक
और हिसाब-किताब का नये साल की शरुआत मानी जाती है
! व्यवसाय आदी नए कार्य करने हेतु इस
पंचमी का महत्त्व है ! जिसे लाभ पंचमी या सौभाग्य पंचमी भी
मानी जाती है ! जैन लोग इस दिन ज्ञान भण्डार एवं मंदिरों
में रखे गए हस्तप्रतो अति मूल्यवान ग्रंथो
को औषध लगा के उसे जंतु मुक्त करके उसकी पूजा करते है !
४.३
फागुन सूद तेरस की यात्रा :
पालीताणा
में फागुन सूद तेरस के दिन श्री शेत्रुन्जय तीर्थ छे गाँव की यात्रा का आरंभ होता
है ! इसका बड़ा महत्त्व है ! इसे
लोग भाषा मे धेबरिया तेरस भी कहते है ! इस छे गाँव की यात्रा
जैनो के लिए बहुत ही मत्वपूर्ण है ! इस पवित्र दिन भाड़वा
पर्वत से पालीताणा के मुख्य मार्ग से शेत्रुन्जय पर्वत पर होकर रामपोल से बहार
निकलते ही बांई ओर से छे गाँव की यात्रा का प्रारंभ होता है !
प्रत्येक
जैन धर्म के अनुयायी अपने जीवन के दौरान कमसे कम एक बार इस छे गाँव की यात्रा करने
की इच्छा रखते है ! इस मेले की यात्रा में जैन ओर जैनेत्तर
लोग इस मेले में आते है! यहाँ पालिताना में इस यात्रा –
मेले में सिर्फ आजके दिन ही दो लाख से ज्यादा लोग आते है !
५. प्रवासीयों
के लिए आवास-निवास
की व्यवस्था :
यहाँ
पालीताणा में आये हुए लोगो के ठहराने का इन्तजाम उपलब्द्ध है ! गुजरात
प्रवासन विभाग के सहयोग से सुमेरु नामक होटेल है जो आवास- निवास
के साथ भोजन की भी सुविधाएं उपलब्द्ध है ! इसके अलावा तकरीबन
१३५ जीतनी जैन धर्मशालाये है जो प्रवासी के लिये ओर खास करके जैन त्योंहारो के दौरान यह सभी धर्मशाला में ठहरने
की जगह नहीं मलती है उतनी भीड़ होती है ! यहाँ का इन्तजाम बहोत
ही अच्छा होता है ! इसके अलावा खानगी होटेल भी है !
६. प्रवासन
उद्यौग में उत्पादन :
पालीताणा
में यहाँ के लोग प्रवासियों के लिये कई प्रकार के चीजों का उत्पादन करते है ! जिसमे
भरतकाम, काष्टकला, शिल्पकाम, हारमोनियम, गुलकंद
इत्यादी चीजों का उत्पादन करके अपने जीवन का गुजारा चलाते है !
“पालीताणा
में हारमोनियम और उसके सूर भारत एवं विदेशो में भी बिकते है ! इसके
अलावा पालीताणा भरतकाम क्षेत्र में सुप्रसिद्ध है !”४
यहाँ आते गुजरात और भारत के अन्य राज्यों के अलावा विदेशी लोग भी यहाँ आकर भरतकाम
किये हुए वस्त्र भी खरीदते हैं, जिसमे कच्छी भरत, बावलिया
भरत, देशी भरत, केनवास
भरत, कांच भरत इत्यादि इसके प्रकार है !
“पालीताणा
में लौहार भाईओ पंचधातु की सुन्दर ऐसी मूर्तियां,
तीर्थंकर भण्डार, अन्य मूर्तियाँ इस पंचधातु से बनाते है ! इस
पंचधातु में सोना, चांदी, ताम्बा, पित्तल, कोपर
का उपयोग करते है !”५
यहाँ जय तलेटी से ऊपर
शिखर तक पहोंचने के लिए जो बीमार या असक्त है या फिर बुजुर्ग है उन लोगो के लिए
डोली का व्यवसाय बहोत ही फैला हुआ है ! यहाँ ऊपर शिखर तक
पहुँचने के लिए डोली का इस्तमाल करते है ! इसमे से पालिताणा के
कई लोग आमदनी प्राप्त करते है !
पालीताणा में इसके
अलावा गुलकंद का व्यवसाय भी है जो गुलाब की पत्तियों व शक्कर की चाहनी को मिलाके
गुलकंद बनाते है,जो हमारे शरीर की सेहत के लिए बहुत ही
अच्छा रहता हैं !
७. पालीताणा
में अन्य देखने लायक जगह :
पालीताणा
में अन्य देखने लायक जगह में शेत्रुन्जय पर्वत पर तलेटी से १ की.मी. की
दूरी पर समवसरण का मंदीर आया हुआ है ! जिसमे १०८ तीर्थो के
दर्शन का लाभ मिलता है,इसकी बनावट ई.स.१९८६
में हुई थी ! इसके अलावा मणिभद्रवीर का मंदीर,कालभैरव
का मंदीर जो पुरे भारत में सिर्फ चार ही जगह पर है - १. काशी, २.उज्जैन, ३.इन्दोर, ४.पालीताणा
! सती राजबाई माता का मंदीर,श्रवण
का मंदीर जो पुरे भारतवर्षमे सिर्फ दो जगह ही है,१.उत्तर
प्रदेश-अयोध्या २.गुजरात-पालीताणा
८. यात्रा
वहन की सुविधाएँ :
पालीताणा
में यात्रा वहन की सुविधाएँ उपलब्द्ध है ! पालिअताना में गुजरात
राज्य मार्ग परिवहन के सहयोग से सरकारी बस की सुविधाएँ है ! यह
सरकारी बसें भावनगर,अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, छोटा
उदेपुर, ऐसी
कई जगहों से इनका संपर्क है ! सरकारी बसें एवं
खानगी ट्रावेल्स की सुविधाएं भी है,जो वातानुकुलिन बसें भी
मिलती है ! इसके अलावा रेलवे भी उपलब्द्ध हैं, और
हवाई मार्ग से अगर आना हो तो भावनगर तक हवाई मार्ग से आ सकते है, वहाँ
से आप बस,गाड़ी या ट्रावेल्स से पालीताणा पहोंच
सकते है !
पालिताणा
से भावनगर ५५ की.मी. की
दुरी पर है ! उना १९५ की.मी.,देलवाडा
२००,बडौदा ३१० की.मी., सूरत
४३२ की.मी., बोम्बे
७४१ की.मी. और
पालीताणा से बड़वानी तकरीबन ४४५ की.मी. तक
का अंतर है !
·
निष्कर्ष :-
इस तरह पालीताणा एक
धार्मिक और ऐतिहासिक यात्रा स्थल है जो भारत और भारत के बाहार से भी लोग यहाँ आते
है ! यहाँ पालीताणा में जैनो का मुख्य मंदीर
और यात्रा धाम होने के कारण आज विश्व में प्रसिद्ध है ! पालीताणा
में ऐतिहासिक स्थापत्य के साथ जैन देरासरो मंदिरों और ऐसी कई जगह है जो पालिताना
में लोगो को आने पर मजबूर कर देती है !ppppppp
पादलिप्तपुर से बना पालीताणा आज दिन-प्रतिदिन प्रगती कर
रहा है और खास करके जैनो के लिए यह एक जैन नगरी बन गई है !
-: पादटिप :-
१. पालीताणा, पूर्णिमा
प्रेस, गांधीनगर, पेज
नं.०२
२. भावनगर
दर्शन, जिल्ला कलेक्टर कचेरी, भावनगर, पेज
नं.१६
३. पालीताणा, पूर्णिमा
प्रेस, गांधीनगर, पेज
नं.२१
४. एजन
पेज नं.२६
५. एजन
पेज नं.३२
( ये सभी किताबे गुजराती में प्रकाशित है !)
-: संदर्भ
साहित्य:-
१.
तिर्थाधिराज श्री
शत्रुंजय (टुंक परिचय),बापालाल
म.ठाकर,शेठ
आणंदजी कल्याणजी,अहमदाबाद
२.
पालीताणा, पूर्णिमा प्रेस, गांधीनगर
३.
श्री शेत्रुन्जय के
चमकते सितारे,भाग-१
एवं २,जैन साहित्य मंदीर,सांचोर,(राज.)
४.
श्री शेत्रुन्जय के
चमकते सितारे,भाग-३
श्री जिनक्रान्तिसागरसूरी स्मारक ट्रस्ट-जालोर,(राज.)
५.
भावनगर दर्शन, जिल्ला
कलेक्टर कचेरी, भावनगर
६.
गुजरात में प्रवासन
विनियोग,
७.
गुजरात राज्य जिल्ला
सर्व संग्रह- भावनगर जिल्ला,गुजरात
राज्य, अहमदाबाद
८.
नगर चोक, हेमंत
राज, २००२
९.
शेठ आणंदजी कल्याणजी
पढ़ी की मुलाक़ात,
१०. जगहों
की रूबरू मुलाक़ात

No comments:
Post a Comment